यथाग्निरिन्धन प्राप्य ज्वलेद् दीप्तार्चिरुल्बणम् | तथा जज्वाल पुत्रस्ते पाण्डुसेनां विनिर्दहन्,उसके बाणोंसे आतुर होकर बहुत-से दन्तार हाथी भी चारों दिशाओंमें भागने लगे। जैसे आग ईंधन पाकर दहकती हुई लपटोंके साथ प्रचण्ड वेगसे प्रज्वलित हो उठती है, उसी प्रकार पाण्डव-सेनाको दग्ध करता हुआ आपका पुत्र दुःशासन अपने तेजसे प्रज्वलित हो रहा था
sañjaya uvāca | yathāgnir indhanaṁ prāpya jvaled dīptārcir ulbaṇam | tathā jajvāla putras te pāṇḍu-senāṁ vinirdahan |
サンジャヤは言った。「薪を得た火が、燃えさかる炎の舌を吐いて猛然と燃え上がるように、汝の子ドゥフシャーサナも武威に燃え立ち、パーンダヴァ軍を焼き払うかのごとく攻め立てた。彼の矢に追い立てられ、多くの象使いたちもまた四方へ逃げ散った。」
संजय उवाच