तत्र वृद्धान् यथावत् स कुरूनन्यांश्व पार्थिवान्,वहाँ पहुँचकर वह महाबाहु नरेश कुरुकुलके वृद्ध पुरुषों तथा अन्य राजाओंको विधिवत् प्रणाम करके स्वयं भी उनके द्वारा सत्कार पाकर बहुत प्रसन्न हुआ। इसके बाद वह अपनी पितामही कुन्तीके सुन्दर महलमें गया
そこに到着すると、強大な腕をもつ王は、クル族の長老たちと他の諸王に、作法どおりに恭しく礼拝した。彼らから手厚くもてなされ、王は大いに喜んだ。ついで祖母クンティーの美しい御殿へと入っていった。
युधिष्ठिर उवाच