अलर्कोपाख्यानम् — Indriya-Nigraha and Yogic Victory
Mahābhārata 14.30
नाध्यगच्छत् परं श्रेयो योगान्मतिमतां वर: । तब वे सामर्थ्यशाली राजा एकाग्रचित्त होकर विचार करने लगे। विप्रवर! बहुत दिनोंतक निरन्तर सोचने-विचारनेके बाद बुद्धिमानोंमें श्रेष्ठ राजा अलर्कको योगसे बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी साधन नहीं प्रतीत हुआ
その力ある王は心を一つに収め、思索に沈んだ。ああ、最勝の婆羅門よ。幾日も絶えず考え抜いたのち、智者の中の第一であるアラルカ王には、ヨーガに勝る福徳の道は他に見いだせなかった。
ब्राह्मण उवाच