Vāc–Manas Saṃvāda: Prāṇa-Apāna and the Primacy Debate (वाक्–मनस् संवादः)
ब्राह्मण उवाच तामपान: पतिर्भूत्वा तस्मात् प्रेषत्यपानताम् । तां गतिं मनसः प्राहुर्मनस्तस्मादपेक्षते,ब्राह्मणने कहा--प्रिये! अपान पतिरूप होकर उस मतिको अपानभावकी ओर ले जाता है। वह अपानभावकी प्राप्ति मनकी गति बतायी गयी है, इसलिये मन उसकी अपेक्षा रखता है
婆羅門は言った。「愛しき者よ、アパーナ(Apāna)が主となって、その意をアパーナの状態へと遣わす。その到達の道を心の行(ガティ)と呼ぶ。ゆえに心はそれを待ち、これに依るのである。」
ब्राह्मण उवाच