Dehānta (Cyavana) and Upapatti: Kāśyapa’s Questions and the Siddha’s Account of Death, Pain, and Karmic Re-embodiment
तादृशीमेव लभते वेदनां मानव: पुनः । भिन्नसंधिरथ क्लेदमद्धि: स लभते नर:,विप्रवर! सभी जीव अपने शरीरोंका त्याग करते देखे जाते हैं। गर्भमें मनुष्य प्रवेश करते समय तथा गर्भसे नीचे गिरते समय भी वैसी ही वेदनाका अनुभव करता है। मृत्यु- कालमें जीवोंके शरीरकी सन्धियाँ टूटने लगती हैं और जन्मके समय वह गर्भस्थ जलसे भीगकर अत्यन्त व्याकुल हो उठता है
tādṛśīm eva labhate vedanāṁ mānavaḥ punaḥ | bhinnasandhir atha kledam addhiḥ sa labhate naraḥ, vipravara |
シッダは言った。「人はまた、まさに同じ類いの痛みを受ける。身の関節が引き裂かれる時、その苦悶を味わい、出生の時には胎内の湿りに濡れて激しく乱れ苦しむ。ゆえに、最勝のバラモンよ、あらゆる生きものが身を捨てるのが見られ、胎内への入りと胎外への落下とは、死の時に等しい苦を伴うのである。」
सिद्ध उवाच