Puṣkara-Śapatha Itihāsa (Agastya–Indra Dispute at the Tīrthas) | पुष्कर-शपथ-आख्यानम्
क्षेत्र हि दैवतमिदं ब्राह्मणान् समुपाश्रितम् । अमलो होष तपसा प्रीत: प्रीणाति देवता:,ब्राह्मणोंका शरीर देवताओंका निवासस्थान है, उसमें सभी देवता विद्यमान रहते हैं। यदि ब्राह्मण तपस्यासे शुद्ध एवं संतुष्ट हो तो वह सम्पूर्ण देवताओंको प्रसन्न करता है
まことにこの身は、ブラーフマナに依りて成る神々の聖域である。ブラーフマナの身体は諸天の住処であり、すべての神々がそこに宿る。もしブラーフマナが苦行(タパス)によって清浄となり、心満ち足りるならば、彼は一切の神々を歓ばせる。
भीष्म उवाच