Go-mahātmyam: Pavitrāṇāṃ Pavitraṃ
Cows and Ghee as Supreme Purifiers
असुर्या नाम ते लोका गां दत्त्वा तानू न गच्छति । पीतोदकां जग्धतृणां नष्टक्षीरां निरिन्द्रियाम्,असुर्य नामके जो अन्धकारमय लोक (नरक) हैं, उनमें गोदान करनेवाले पुरुषको नहीं जाना पड़ता। जिसका घास खाना और पानी पीना प्राय: समाप्त हो चुका हो, जिसका दूध नष्ट हो गया है, जिसकी इन्द्रियाँ काम न दे सकती हों, जो बुढ़ापा और रोगसे आक्रान्त होनेके कारण शरीरसे जीर्ण-शीर्ण हो बिना पानीकी बावड़ीके समान व्यर्थ हो गयी हो, ऐसी गौका दान करके मनुष्य ब्राह्मणको व्यर्थ कष्टमें डालता है और स्वयं भी घोर नरकमें पड़ता है
bhīṣma uvāca | asuryā nāma te lokā gāṁ dattvā tānū na gacchati | pītodakāṁ jagdhatṛṇāṁ naṣṭakṣīrāṁ nirindriyām |
ビーシュマは言った。「『アスーリヤ』と呼ばれる世界がある。そこは日なき闇の境である。正しい状態の牝牛を施す者は、その境へ赴くことはない。だが、水を与えられず、草も尽き、乳は損なわれ、感官も力も衰えた—老い病む—牝牛を与えるなら、その“施し”は受け取るバラモンに無益の苦しみを負わせるだけで、施主自身もまた恐るべき地獄へ堕ちる。」
भीष्म उवाच