Pūjya-namaskārya-prakaraṇa
On Those Worthy of Honor and Salutation
मतडज् उवाच इदं वर्षसहसंर वै ब्रह्मचारी समाहित: । अतिष्ठमेकपादेन ब्राह्म॒ण्यं नाप्तुयां कथम्,मतंगने कहा--देवराज! मैंने ब्रह्मचर्य-पालनपूर्वक एकाग्रचित्त हो एक हजार वर्षोंतक एक पैरसे खड़ा होकर तप किया है। फिर मुझे ब्राह्मणत्व कैसे नहीं प्राप्त हो सकता?
マタンガは言った。「神々の王よ!私は梵行(ブラフマチャリヤ)を守り、心を一つに定め、片足で立って千年のあいだ苦行(タパス)を行ってきた。どうして私が婆羅門の位を得られぬことがあろうか。」
मतडज् उवाच