मातङ्ग–शक्रसंवादः
Mataṅga–Śakra Dialogue on Tapas, Status, and Moral Qualities
इन्दुब्रतसहस्र॑ तु यश्चरेत् कायशोधनम् । पिबेद् यश्चापि गज्भाम्भ: समौ स्यातां न वा समौ,जो शरीरको शुद्ध करनेवाले एक सहस्र चान्द्रायण व्रतोंका अनुष्ठान करता है और जो केवल गड़ाजल पीता है, वे दोनों समान ही हैं अथवा यह भी हो सकता है कि दोनों समान नहों (गड़ाजल पीनेवाला बढ़ जाय)
induvrata-sahasraṁ tu yaś caret kāya-śodhanam | pibed yaś cāpi gaṅgāmbhaḥ samau syātāṁ na vā samau ||
シッダは言った。「身を清めるために月例の贖罪戒(チャンドラーイヤナ Cāndrāyaṇa)を千も修する者がいる。別の者はただガンガーの水を飲むのみである。両者は等しいと見なされることもあろう—あるいは等しくなく、ガンガー水を飲むことが勝ることさえある。」
सिद्ध उवाच