Aṣṭāvakra–Strī-saṃvāda: Dhṛti, hospitality, and a dispute on autonomy
वदान्य उवाच धनदं समतिक्रम्य हिमवन्तं च पर्वतम् । रुद्रस्यायतनं दृष्टवा सिद्धचारणसेवितम्,वदान्यने कहा--वत्स! तुम कुबेरकी अलकापुरीको लाँधकर जब हिमालय पर्वतको भी लाँघ जाओगे तब तुम्हें सिद्धों और चारणोंसे सेवित रुद्रके निवासस्थान कैलास पर्वतका दर्शन होगा
ヴァーダーニャは言った。「わが子よ。財宝神クベーラの都アラカーを越え、さらにヒマヴァーン(ヒマラヤ)の山々を踏み越えたなら、成就者(シッダ)とチャーラナたちに仕えられるルドラの住処、カイラーサ山を目にするであろう。」
वदान्य उवाच