कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
अपरे स्तम्भिनो नित्यं मानिन: पापतो रता: । आसनार्हसय ये पीठं न प्रयच्छन्त्यचेतस:,इनके सिवा दूसरे भी ऐसे मनुष्य हैं, जो सदा गर्व और अभिमानमें फूले तथा पापमें रत रहते हैं। वे मूर्ख आसन देनेयोग्य पूज्य पुरुषको बैठनेके लिये कोई पीढ़ा या चौकीतक नहीं देते हैं
また別の者どもがいる。彼らは常に頑なで、驕りと自負にふくれ、罪に耽っている。そうした愚か者は、座に値する尊ぶべき人に対して、腰掛けるための座具を――小さな腰掛け一つさえ――差し出さない。
श्रीमहेश्वर उवाच