ब्राह्मण–क्षत्रिय-श्रेष्ठता-विवादः
Arjuna–Vāyu Dialogue on Brāhmaṇa and Kṣatriya Precedence
एवं मन्यामहे सर्वे भारार्ता निरपेक्षिण: । इस प्रकार संतुष्ट होकर पृथ्वीके नीचे भारसे पीड़ित होनेपर भी हम सब लोगोंको वह परिश्रम प्रतीत नहीं होता है और हमलोग सुखपूर्वक वसुधाका भार वहन करते हैं। भारसे पीड़ित होनेपर भी किसीसे कुछ न चाहनेवाले हम सब लोग ऐसा ही मानते हैं
かくして我らは皆——重荷に悩まされながらも誰にも依らず、何ものも求めぬ者たちは——こう思うのである。「ゆえに、たとえ大地の下で重みのために苦しむことがあっても、その労は苦役とは感じられぬ。われらは安らかに住み、ヴァスダー(大地)の重荷を心安く担っているのだ。」
रेणुक उवाच