Brāhmaṇa-pūjā and Namaskāra: Criteria of Reverence and Non-Offense (ब्राह्मणपूजा-नमस्कारविधिः)
के च स्मृता: प्रतीघाता येन मर्त्यान् न हिंसथ । रक्षोघ्नानि च कानि स्पुर्यर्गुहिषु प्रणश्यथ । श्रोतुमिच्छाम युष्माकं सर्वमेतन्निशाचरा:,“वे कौन-से प्रतिघात (शत्रुके आघातोंको रोक देनेवाले उपाय) हैं, जिनका आश्रय लेनेसे आपलोग उन मनुष्योंकी हिंसा नहीं करते। वे रक्षोघ्न मन्त्र कौन-से हैं, जिनका उच्चारण करनेसे आपलोग घरमें ही नष्ट हो जायूँ या भाग जायँ? निशाचरो! ये सारी बातें हम आपके मुखसे सुनना चाहते हैं!
ke ca smṛtāḥ pratīghātā yena martyān na hiṃsatha | rakṣoghnāni ca kāni spuryar-guhīṣu praṇaśyatha | śrotum icchāma yuṣmākaṃ sarvam etan niśācarāḥ ||
ビーシュマは言った。「いかなる伝承の対抗手段(プラティガータ)によって、そなたらは人間を害さぬのか。また、いかなる羅刹滅しの呪(ラクショーグナ)を唱えれば、そなたらは家の内でそのまま滅びるか、あるいは逃げ去るのか。夜の徘徊者よ、これらすべてをそなたら自身の口から聞きたい。」
भीष्म उवाच