Ādi Parva, Adhyāya 181 — Svayaṃvara Aftermath: Arjuna–Karna Exchange and Bhīma–Śalya Contest
भर्तरें भक्षयामास व्याप्रो मृगमिवेप्सितम् । तस्या: क्रोधाभिभूताया यान्यश्रूण्यपतन् भुवि,इस प्रकार ब्राह्मगी करुण विलाप करती हुई याचना कर रही थी, तो भी जैसे व्याप्र मनचाहे मृगको मारकर खा जाता है, उसी प्रकार राजाने अत्यन्त निर्दयीकी भाँति ब्राह्यणीके पतिको खा लिया। उस समय क्रोधसे पीड़ित हुई ब्राह्मणीके नेत्रोंसे धरतीपर आँसुओंकी जो बूँदें गिरी, वे सब प्रज्वलित अग्नि बन गयीं। उस अग्निने उस स्थानको जलाकर भस्म कर दिया। तदनन्तर पतिके वियोगसे व्यथित एवं शोकसंतप्त ब्राह्मणीने रोषमें भरकर राजर्षि कल्माषपादको शाप दिया--'ओ नीच! मेरी पतिविषयक कामना अभी पूर्ण नहीं हो पायी थी, तभी तूने अत्यन्त क्रूरकी भाँति मेरे देखते-देखते आज मेरे महायशस्वी प्रियतम पतिको अपना ग्रास बना लिया है; अतः दुर्बुद्धे! तू भी मेरे शापसे पीड़ित हुआ ऋतुकालमें पत्नीके साथ समागम करते ही तत्काल प्राण त्याग देगा। जिन महर्षि वसिष्ठके पुत्रोंका तुमने संहार किया है, उन्हींसे समागम करके तेरी पत्नी पुत्र पैदा करेगी। नृूपाधम! वही पुत्र तेरा वंश चलानेवाला होगा”
bhartāraṁ bhakṣayāmāsa vyāghro mṛgam ivepsitam | tasyāḥ krodhābhibhūtāyā yāny aśrūṇy apatan bhuvi ||
ガンダルヴァは語った。「欲する鹿を捕らえて食らう虎のごとく、王はその婆羅門の女の夫を食らい尽くした。怒りに呑まれた彼女の涙は地に落ちるや炎と化し、その場を焼き尽くして灰とした。ついで夫との別離に苦しみ、悲嘆に灼かれた彼女は、王仙カルマーシャパーダに呪詛を宣した。――わが夫に関する願いがなお満たされぬうちに、卑劣にして無慈悲なる汝は、我が目の前で名高き愛夫を餌食とした。ゆえにこの呪いにより、汝が妻の受胎の季に近づき交わるその瞬間、汝はただちに命を失うであろう。さらに汝の妻は、汝が滅ぼした大聖ヴァシシュタの子ら、その同じ系統と交わって一子を産む。その子こそ汝の血脈を継ぐ者となる。」
गन्धर्व उवाच