पुनर्ययतेन मां जित्वा वनवासं सुदारुणम् । प्रावत्राजयन् महारण्यमजिनै: परिवारितम्,“एक बार जूएके संकटसे बच जानेपर पुनः द्यूतका आयोजन करके उन्होंने मुझे जीत लिया और मृगचर्म पहनाकर वनवासका अत्यन्त दारुण कष्ट भोगनेके लिये इस महान् वनमें निर्वासित कर दिया
वैशम्पायन उवाच