नाशुद्धबाहुवीर्येण नाकृतास्त्रेण वा रणे । भीष्मद्रोणादयो युद्धे शक््या: प्रतिसमासितुम्,“जिसका बाहुबल पूर्ण अस्त्रशिक्षाके अभावसे त्रुटिपूर्ण हो तथा जिसने अस्त्रविद्याका पूर्ण ज्ञान न प्राप्त किया हो, वह युद्धमें भीष्म-ट्रोण आदिका सामना नहीं कर सकता
वैशम्पायन उवाच