धृतराष्ट्र–संजय संवादः
Dhṛtarāṣṭra and Sañjaya on Arjuna’s Indraloka report and the political consequences
दिव्याड्रागौं सुमुखौ दिव्यचन्दनरूषितौ । गच्छन्त्या हाररुचिरौ सतनौ तस्या ववल्गतुः:,चलते समय सुन्दर हारोंसे विभूषित उर्वशीके उठे हुए स्तन जोर-जोरसे हिल रहे थे। उनपर दिव्य अंगराग लगाये गये थे। उनके अग्रभाग अत्यन्त मनोहर थे। वे दिव्य चन्दनसे चर्चित हो रहे थे
वैशम्पायन उवाच