Ajñātavāsa-saṅkalpaḥ — Yudhiṣṭhira’s Resolve and Dhaumya’s Exempla on Concealment
सत्यवानुवाच शिरोरुजा निवृत्ता मे स्वस्थान्यज्राननि लक्षये | मातापितृभ्यामिच्छामि संगम त्वत्प्रसादजम्,सत्यवानने कहा-्रिये! मेरे सिरका दर्द दूर हो गया है। मुझे अपने सब अंग स्वस्थ दिखायी देते हैं। अब तुम्हारे कृपाप्रसादसे मैं अपने माता-पितासे मिलना चाहता हूँ
यम उवाच