Karṇa–Sūrya Saṃvāda: Satya, Dāna, and the Amoghā Śakti (कर्ण–सूर्यसंवादः)
सौमित्रिरपि नाराचैदढधन्वा जितक्लम: । आदिश्यादिश्य दुर्गस्थान् पातयामास राक्षसान्,क्लेश और थकावटपर विजय पानेवाले सुदृढ़ धनुर्धर सुमित्राकुमार लक्ष्मण भी सूचना दे-देकर नाराच नामक बाणोंद्वारा दुर्गके भीतर रहनेवाले राक्षसोंको भी मार गिराने लगे
मार्कण्डेय उवाच