सावित्री-यमसंवादः
Sāvitrī’s Dialogue with Yama and the Restoration of Satyavān
चिन्तयित्वा मुहूर्त तु तारा ताराधिपप्रभा । पतिमित्यब्रवीत् प्राज्ञा शृणु सर्व कपीश्चर,तारा अपनी अंगकान्तिसे चन्द्रमाकी ज्योत्स्नाके समान उद्दीप्त हो रही थी। उस विदुषीने दो घड़ीतक विचार करके अपने पतिसे कहा--“कपीश्वर! मैं सब बातें बताती हूँ, सुनिये
मार्कण्डेय उवाच