चित्रसेन-समागमः / The Engagement with Citrasena and the Gandharvas
तान् सर्वानग्रहारेण ब्राह्मणान् वेदवादिन: । यथा पूजयामि सम पानाच्छादनभोजनै:,“मैं उन सब वेदवादी ब्राह्मणोंको अग्रहार (बलिवैश्वदेवके अन्तमें अतिथिको दिये जानेवाले प्रथम अन्न)-का अर्पण करके भोजन, वस्त्र और जलके द्वारा उनकी यथायोग्य पूजा करती थी
वैशम्पायन उवाच