Dharma-vyādha’s Analysis of Moral Decline and the Mahābhūta–Guṇa Schema (धर्मव्याधोपदेशः)
इन्द्रियाणां प्रसादेन तदेतत् परिवर्जयेत् । तस्मादनशनं दिव्यं निरुद्धेन्द्रियगोचरम्,अतः मनुष्यको इन्द्रियोंकी शुद्धिके द्वारा इन विषयभोगोंको त्याग देना चाहिये। यह इन्द्रियोंकी निर्मलता और निरोधसे होनेवाला अनशन (विषयोंका अग्रहण) दिव्य होता है
युधिछिर उवाच