निम्ने कृषिं करिष्यन्ति योक्ष्यन्ति धुरि धेनुका: । एकहायनवत्सांशक्ष॒ योजयिष्यन्ति मानवा:,मनुष्य नीची भूमिमें (अर्थात् गायोंके जल पीने और चरनेकी जगहमें) खेती करेंगे। दूध देनेवाली गायोंको भी बोझ ढोनेके काममें लगा देंगे और सालभरके बछड़ोंको भी हलमें जोतेंगे
मार्कण्डेय उवाच