यानाहुर्ब्रह्मण: पुत्रान् मानसात् दक्षसप्तमान् । तेषामपि महामेरु: शिवं स्थानमनामयम्,“जिन्हें ब्रह्माजीका मानसपुत्र बताया जाता है और जिनमें दक्षप्रजापतिका स्थान सातवाँ है। उन समस्त प्रजापतियोंका भी यह महामेरु पर्वत ही रोग-शोकसे रहित सुखद स्थान है
वैशम्पायन उवाच