इन्द्रस्य पाण्डवैः समागमः
Indra’s Meeting with the Pāṇḍavas
ते जवेन महावेगा: प्राप्य वैश्रवणालयम्,वे महान् वेगशाली तो थे ही, तीव्र गतिसे धनाध्यक्षके महलमें पहुँचकर भयंकर आर्तनाद करने लगे। भीमसेनका भय उस समय भी उन्हें पीड़ा दे रहा था। वे अपने अस्त्र- शस्त्र छोड़ चुके थे एवं थके हुए थे। उनके कवच खूनसे लथपथ हो गये थे
वैशम्पायन उवाच