शोक-शमन उपदेशः
Instruction on the Pacification of Grief
गृहाणीव हि मर्त्यानामाहुर्देहानि पण्डिता: । कालेन विनियुज्यन्ते सत्त्वमेकं॑ तु शाश्वतम्,पण्डितलोग मरणधर्मा प्राणियोंके शरीरोंको घरके तुल्य बतलाते हैं; क्योंकि सारे शरीर समयपर नष्ट हो जाते हैं, किंतु उसके भीतर जो एकमात्र सत्त्वस्वरूप आत्मा है, वह नित्य है
विदुर उवाच