हत्वा मद्राधिपं पार्थों भोक्ष्यतेड्द्य वसुन्धराम्,भरतनन्दन! “आज कुन्तीकुमार युधिष्छिर मद्रराजको मारकर इस भूतलका राज्य भोगेंगे अथवा शल्य ही पाण्डुकुमार युधिष्ठिरको मारकर दुर्योधनको भूमण्डलका राज्य सौंप देंगे।। इस बातका निश्चय वहाँ योद्धाओंको नहीं हो पाता था
संजय उवाच