Book 10, Adhyāya 12: Aśvatthāmā’s Request for the Cakra and the Brahmaśiras Context
एतत् सुभीम॑ भीमानामृषभेण त्वया धृतम् | चक्रमप्रतिचक्रेण भुवि नान्योडभिपद्यते,“यह चक्र अत्यन्त भयंकर है और आप भी भयानक वीरोंके शिरोमणि हैं। आपके किसी विरोधीके पास ऐसा चक्र नहीं है। आपने ही इसे धारण कर रखा है। इस भूतलपर दूसरा कोई पुरुष इसे नहीं उठा सकता”
वैशम्पायन उवाच