महाहवे तं बहु रोचमानं धनंजयं भूतगणा: समेता: । तदान्वमोदन्त जनार्दनं च दिवाकरावभ्युदितौ यथैव,उस समय उदित हुए दो सूर्योंके समान उस महासमरमें प्रकाशित होनेवाले अत्यन्त कान्तिमान् अर्जुन तथा भगवान् श्रीकृष्णके पास आकर समस्त प्राणी उनके कार्यका अनुमोदन करने लगे
शल्य उवाच