न तान् रथस्थो भूमिष्ठान् धमपिक्षी वृकोदर: । योधयामास कौन्तेयो भुजवीर्यव्यपाश्रय:,कुन्तीनन्दन भीमसेन युद्धधर्मका पालन करनेवाले थे, इसलिये उन्होंने स्वयं रथपर बैठकर भूमिपर खड़े हुए पैदल-सैनिकोंके साथ युद्ध नहीं किया। उन्हें अपने बाहुबलका पूरा भरोसा था
संजय उवाच