अद्यैतद् वै विदितं पार्थिवानां भविष्यति हाकुमारं च सूत । निमग्नो वा समरे भीमसेन एक: कुरून् वा समरे व्यजैषीत्,सूत! आज बच्चोंसे लेकर बूढ़ोंतक समस्त भूपालोंको यह विदित हो जायगा कि भीमसेन समरसागरमें डूब गये अथवा उन्होंने अकेले ही समस्त कौरवोंको युद्धमें जीत लिया
भीमसेन उवाच