जल पीत्वा मृतान् पश्य पिबतो<न््यांश्व॒ मारिष,'श्रेष्ठ वीर अर्जुन! उधर देखो, कुछ लोग पानी पीकर मर गये और कुछ लोग पीते-पीते ही अपने प्राण खो बैठे। कितने ही बान्धवजनोंके प्रेमी सैनिक अपने प्रिय बान्धवोंको छोड़कर उस महासमरमें जहाँ-तहाँ प्राणशून्य हुए दिखायी देते हैं
संजय उवाच