भीमसेनस्य वेगाभिपातः—विशोकसारथिसंवादश्च
Bhīma’s surge and dialogue with charioteer Viśoka
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ४६ श्लोक हैं) अपन बछ। है २ >> पञ्चपज्चाशत्तमो< ध्याय: अश्वत्थामाका घोर युद्ध, सात्यकिके सारथिका वध एवं युधिष्ठटिरका अश्वत्थामाको छोड़कर दूसरी ओर चले जाना संजय उवाच द्रौणिर्युधिष्िरं दृष्टवा शैनेयेनाभिरक्षितम् । द्रौपदेयैस्तथा शूरैरभ्यवर्तत हृष्टवत्,संजय कहते हैं--राजन्! सात्यकि तथा शूरवीर द्रौपदीपुत्रोंद्वारा सुरक्षित युधिष्ठिरको देखकर अअभ्रत्थामा बड़े हर्षके साथ उनका सामना करनेके लिये गया इस प्रकार श्रीमह्याभारत कर्णपर्वमें युधिष्ठिरका पलायनविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ५५ ॥। (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ४२ श्लोक हैं) प्यास बक। -ज॑ऑ:डिेड षट्पज्चाशत्तमो<5 ध्याय: नकुल-सहदेवके साथ दुर्योधनका युद्ध, धृष्टद्युम्नसे दुर्योधनकी पराजय, कर्णद्वारा पांचाल-सेनासहित योद्धाओंका संहार, भीमसेनद्वारा कौरव योद्धाओंका सेनासहित विनाश, अर्जुनद्वारा संशप्तकोंका वध तथा अश्वत्थामाका अर्जुनके होना घोर युद्ध करके पराजित ना संजय उवाच भीमसेनं सपाज्चाल्यं चेदिकेकयसंवृतम् । वैकर्तन: स्वयं रुद्ध्वा वारयामास सायकै:
sañjaya uvāca |
bhīmasenaṃ sapāñcālyaṃ cedikekayasaṃvṛtam |
vaikartanaḥ svayaṃ ruddhvā vārayāmāsa sāyakaiḥ ||
Sañjaya said: O King, Karṇa (Vaikartana), personally barring the way, checked Bhīmasena—who was accompanied by the Pāñcālas and surrounded by the Cedis and the Ekakayas—holding him back with volleys of arrows. The scene underscores how, in the frenzy of war, even the mightiest are restrained not by counsel but by force, as rival champions deliberately intercept one another to shape the battle’s moral and strategic outcome.
संजय उवाच