यथा मध्यन्दिने सूर्यो दुष्प्रेक्ष्य: प्राणिभि: सदा । तथा धनंजय: क्रुद्धो दुष्प्रेक्ष्यो युधि शत्रुभि:,जैसे दोपहरके सूर्यकी ओर देखना समस्त प्राणियोंके लिये सदा ही कठिन होता है, उसी प्रकार उस युद्धस्थलमें कुपित हुए अर्जुनकी ओर शत्रुलोग बड़ी कठिनाईसे देख पाते थे
संजय उवाच