Shloka 633

सहस्रनेत्रपादाय नमो5संख्येयकर्मणे । विश्वके स्वामी और महापुरुषोंके पालक भगवान्‌ शिवको नमस्कार है, जिनके सहस्रों सिर और सहसों भुजाएँ हैं, जो मृत्युस्वरूप हैं, जिनके नेत्र और पैर भी सहस्रोंकी संख्यामें हैं तथा जिनके कर्म असंख्य हैं, उन भगवान्‌ शिवको नमस्कार है

सहस्रनेत्रपादायto (him) of thousand eyes and feet
सहस्रनेत्रपादाय:
Sampradana
TypeNoun
Rootसहस्र-नेत्र-पाद (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Dative, Singular
नमःsalutation
नमः:
TypeIndeclinable
Rootनमस् (प्रातिपदिक)
असंख्येयकर्मणेto (him) whose deeds are innumerable
असंख्येयकर्मणे:
Sampradana
TypeNoun
Rootअसंख्येय-कर्मन् (प्रातिपदिक)
FormMasculine, Dative, Singular

संजय उवाच