Droṇa-parva Adhyāya 60: Arjuna’s return, auspicious omens, and mission delegation
तस्य सेन्द्रै: सुरगणैर्देवर्यय: स्वलड्कृत: । सम्यक्परिगृहीतश्न शान्तविध्नो निरामय:,इन्द्र आदि सम्पूर्ण देवताओंने उनके यज्ञको सुशोभित किया था। उसमें प्राप्त हुए हविष्यको भलीभाँति ग्रहण करके उसके विघ्नोंको शान्त करते हुए उसे निर्बाधरूपसे पूर्ण किया था
नारद उवाच