Abhimanyu-śravaṇa-prastāva and Cakravyūha-vinyāsa
Prelude to Abhimanyu’s Account and the Wheel-Formation Deployment
विक्रीडितं कुमारेण यथानीकं बिभित्सता । आरुग्णाश्न यथा वीरा दुः:साध्याश्वापि विप्लवे,आपकी सेनाके व्यूहका भेदन करनेकी इच्छासे कुमार अभिमन्युने जिस प्रकार रणक्रीड़ा की थी और उस प्रलयंकर संग्राममें जैसे-जैसे दुर्जय वीरोंके भी पाँव उखाड़ दिये थे, वह सब बता रहा हूँ
संजय उवाच