Chapter 30: Formation Disruption, Competing War-Cries, and Nīla’s Fall
Droṇa-parva
नानाविधान्यनीकानि पुत्राणां तव भारत । अर्जुनो व्यधमत् काले दिवीवाभ्राणि मारुत:,भरतनन्दन! युधिष्ठिरकी सेनाके सैनिक इधर-उधरसे घातक प्रहार कर रहे थे। जैसे वायु आकाशमें बादलोंको छिन्न-भिन्न कर देती है, उसी प्रकार उस समय अर्जुन आपके पुत्रोंकी विभिन्न सेनाओंका विनाश करने लगे
संजय उवाच