भीमसेन-धृष्टद्युम्नयोर्वाक्यं
Bhīmasena and Dhṛṣṭadyumna’s Speeches on Kṣātra-Dharma
द्रौणिमभ्यद्रवत् क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी । “आज समरांगणमें मैं तेरी युद्धविषयक श्रद्धा दूर कर दूँगा।! ऐसा कहकर क्रोधसे लाल आँखें किये, शत्रुवीरोंका हनन करनेवाले कुपित राक्षस घटोत्कचने अश्वत्थामापर उसी प्रकार धावा किया, जैसे सिंह किसी गजराजपर आक्रमण करता है
संजय उवाच