सात्यकिरुवाच न हन्तव्यो न हन्तव्य इति यन्मां प्रभाषत । धर्मवादैरधर्मिष्ठा धर्मकज्चुकमास्थिता:,सात्यकि बोले--धर्मका चोला पहनकर खड़े हुए अधर्मपरायण पापात्माओ! इस समय धर्मकी बातें बनाते हुए तुमलोग जो मुझसे बारंबार कह रहे हो कि “न मारो, न मारो' उसका उत्तर मुझसे सुन लो
संजय उवाच