समीपे सैनिकास्ते तु शीघ्रमीयुर्युयुत्सव: । जह्याद्रवस्व तिछेति पश्य पश्येति वादिन:,अमित तेजस्वी सात्यकि जब इस प्रकार कह रहे थे, उसी समय युद्धके लिये उत्सुक हुए आपके सारे सैनिक शीघ्र ही उनके समीप आ पहुँचे। वे “दौड़ो, मारो, ठहरो, देखो-देखो” इत्यादि बातें बोल रहे थे
संजय उवाच