द्रोणेन केकय-चेदि-वीरवधः
Droṇa’s engagements with the Kekayas and Cedis
इदमस्तीत्यसम्भ्रान्तो ब्रुवन्नस्त्रेण मेदिनीम् । अभिटहत्यार्जुनक्षक्रे वाजिपानं सर: शुभम्,“यह रहा इनके पीनेके लिये जल” ऐसा कहकर अर्जुनने बिना किसी घबराहटके अस्त्रद्वारा पृथ्वीपर आघात करके घोड़ोंके पीनेयोग्य जलसे भरा हुआ सुन्दर सरोवर उत्पन्न कर दिया
संजय उवाच