Dhṛtarāṣṭra–Sañjaya-saṃvādaḥ; madhyāhna-saṅgrāma-pravṛttiḥ
Dhritarashtra–Sanjaya dialogue and the midday battle escalation
न्यहनत् तावकांश्चवापि सात्यकि: सत्यविक्रम: । निशितैर्बहुभिर्बाणिस्ते5द्रवन्त भयाद्दिता:,तत्पश्चात् सत्यपराक्रमी सात्यकिने अपने बहुसंख्यक तीखे बाणोंद्वारा आपके अन्य योद्धाओंको भी मारना आरम्भ किया। उस समय उनके भयसे पीड़ित हो वे सब योद्धा भागने लगे
संजय उवाच