भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
सम्बन्ध-- इस प्रकार तत्त्वज्ञानमें सहायक सात्विकभावको ग्रहण करानेके लिये और उसके विरोधी राजस-तामय भावोंका त्याग करानेके लिये कर्म-प्रेरणा और कर्म संग्रहमेंसे ज्ञान, कर्म और कतकि सात्विक आदि तीन-तीन भेद क्रमसे बतलाकर अब बुद्धि और ध्ृतिके सात्विक, राजस और तामस--इस प्रकार त्रिविध भेद क्रमशः बतलानेकी प्रस्तावना करते हुए बतलाते हैं-- बुद्धेर्भेद धृतेश्नेव गुणतस्त्रिविधं शृणु । प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनंजय,हे धनंजय! अब तू बुद्धिका और धृतिका भी गुणोंके अनुसार तीन प्रकारका भेद मेरे द्वारा सम्पूर्णतासे विभागपूर्वक कहा जानेवाला सुन
buddher bhedaṁ dhṛteś caiva guṇatas trividhaṁ śṛṇu | procyamānam aśeṣeṇa pṛthaktvena dhanañjaya ||
Arjuna said: “O Dhanañjaya, now hear from me, in full and with clear distinctions, the threefold classification—according to the guṇas—of both understanding (buddhi) and steadfast resolve (dhṛti).”
अजुन उवाच