Adhyāya 90: Babhruvāhana’s Reception and the Commencement of Yudhiṣṭhira’s Aśvamedha
पूजा: पूजिताश्चात्र विधिवच्छास्त्रदर्शनात् । मन्त्राहुतिहुतश्वान्निर्दत्त देयममत्सरम्,“इसमें शास्त्रीय दृष्टिसे पूजनीय पुरुषोंकी विधिवत् पूजा की गयी है। अग्निमें मन्त्र पढ़कर आहुति दी गयी है और देनेयोग्य वस्तुओंका ईर्ष्यारहित होकर दान किया गया है
वैशग्पायन उवाच