इत्युक्त: स हृषीकेशो ध्यात्वा सुमहदुत्तरम् राजानं भोजराजन्यवर्धनो विष्णुरब्रवीत्,युधिष्ठिरके इस प्रकार पूछनेपर भोजवंशी क्षत्रियोंकी वृद्धि करनेवाले भगवान् हृषीकेश विष्णुने बहुत देरतक उत्तम रीतिसे चिन्तन करनेके बाद राजा युधिष्ठिरसे यों कहा --
युधिष्ठिर उवाच