आगमिष्यन्ति राजान: सर्वे वै कौरवर्षभ | प्राप्तानां महतां पूजा कार्या होतत् क्षमं हि न:,“(अर्जुन कहते हैं--) “कौरवश्रेष्ठ! अश्वमेधयज्ञमें प्रायः सभी राजा पधारेंगे। जो आ जायँ उन सबको महान् मानकर उन सबका पूर्ण सत्कार करना चाहिये। यही हमारे योग्य कार्य है
वैशम्पायन उवाच