Brahmopadeśa: Ahiṃsā, Jñāna, and the Kṣetrajña–Sattva Analysis
Chapter 49
तेन नो&विह्िता प्रज्ञा मनश्न बहुलीकृतम् एतदाख्यातमिच्छाम: श्रेय: किमिति सत्तम,इस कारण हमलोगोंकी बुद्धि विचलित हो गयी है और मन भी बहुत-से संकल्प- विकल्पोंमें पड़कर चंचल हो गया है। श्रेष्ठ ब्रह्मन! हम यह जानना चाहते हैं कि वास्तविक कल्याणका मार्ग क्या है?
वायुदेव उवाच