Sāttvika-vṛtta-kathana (Brahmā on the Conduct of Sattva) — Chapter 38
इत्येतत् सात्त्विकं वृत्तं कथित वो द्विजर्षभा: । एतद् विज्ञाय लभते विधिवद् यद् यदिच्छति,श्रेष्ठ ब्राह्मणों! इस प्रकार मैंने तुमलोगोंसे सत्त्वगुणके कार्योंका वर्णन किया। जो इस विषयको अच्छी तरह जानता है, वह जिस-जिस वस्तुकी इच्छा करता है, उसीको पा लेता है
वायुदेव उवाच