अध्वर्यु–यति संवादः
Adhvaryu–Yati Dialogue on Svabhāva, Ahiṃsā, and Mokṣa
यतिरुवाच प्राणैर्वियोगे च्छागस्य यदि श्रेय: प्रपश्यसि । छागार्थे वर्तते यज्ञों भवत: कि प्रयोजनम्,यतिने कहा--यदि तुम बकरेके प्राणोंका वियोग हो जानेपर भी उसका कल्याण ही देखते हो, तब तो यह यज्ञ उस बकरेके लिये ही हो रहा है। तुम्हारा इस यज्ञसे क्या प्रयोजन है?
ब्राह्मण उवाच